Antarvasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 11

मुन्ना~: मैं दावे से कह सकता हूँ सर….वो लोग इस दुनिया में नहीं है….सबका मर्डर हो चुका है…?
दोष~: खुल कर बताओ.
मुन्ना ने जितना पता लगाया था सब दोष को बता दिया.
दोष~: ह्म्‍म्म्मम……तो फिर आगे क्या करोगे…?
मुन्ना~: सारे फ़साद की झड़ वो सबूत है…जिसके लिए इतना बड़ा कांड हुआ….आख़िर क्या था उस सबूत में….यही जाने की कोशिश कर रहा हूँ….इस केस में बॉन्ड की भी मदद ले रहा हूँ…!
दोष~: बॉन्ड को मेरा थेन्कस कहना.
मुन्ना~; इसे सर ..कह दूँगा.
दोष~: सिंग….ये मामला बड़ा नाज़ुक है….इसे ज़रा केयरफुल हैंडिल करना…..एक गलती का ख़ामियाजा महँगा पड़ सकता है…
मुन्ना~: मैं जनता हूँ सर…पर एक बात में दावे से कह सकता हूँ…
दोष~: क्या…?
मुन्ना~: ये केस पहली नज़र में जो नज़र आता है है इतना सीधा है नहीं…
दोष~: फिर….?
मुन्ना~: सर कोई गहरा पहलू है जो अब तक छिपा है….एक धमाकेदार पहलू…जिसके खुलते ही सब बदल जाएगा…
दोष~: तुम्हें ऐसा क्यों लगा…?
मुन्ना~: आप ही सोचिए सर….क्या उनका कत्ल करना जरूरी था…जबकि सारा पावर जज के हाथ में था….पता चला है की क्षसे दबा दिया था….केस खत्म ही होने वाला था की तभी ये सबूत प्रकट हुआ….
आप ही सोचिए….ये सबूत क्या था…..एक वीडियो फुटेज….पक्का तो नहीं कह सकता हूँ सर….पर पूछताच्छ में भी यही पता चला है….
दोष~: कहते रहो सिंग….?
मुन्ना~: मना सर की संयोग से सबूत मिस्टर. ठाकुर के हाथ लग गया……क्या उस सबूत के लिए सबको गायब करके मारना जरूर था…..चलो मना जरूरी था….तो अगर देखा जाए तो इस केस से जुड़ा हर आदमी सजा पा चुका है….यहाँ तक की जो इंस्पेक्टर. मनिराम इस केस की पड़ताल कर रहा था…वो भी सजा पा चुका है….
इतना कहकर मुन्ना ने एक लंबी साँस भारी…..फिर बोला.
मुन्ना~: फिर ये मामला इतना टूल क्यों पदक रहा है…क्यों सब कुच्छ अब तक साफ नहीं हुआ है….क्यों वो लड़का हर केस से जुड़ा है….क्यों वो देव ना होते हुए भी खुद को देव कह रहा है….आख़िर क्या है जो बाकी है…चुत रहा है….
दोष~: क्या…?
मुन्ना~: अभी भी एक पॉवेरफ़ुल्ल अपराधी है जो इस केस का मुख्य आरोपी है…..जिसे देव खुद नहीं…..कानून सजा दिलाना चाहता है…वरना अब तक वो खुद सजा दे चुका होता….ऐसा नहीं है की वो उस तक. नहीं पहुँच सकता है….पहुँच सकता है….मगर पहुँचना नहीं बेनक़ाब करना चाहता है….समाज के सामने सारी कहानी लाना चाहता है.
दोष~: वेल्लडोने सिंग….सही जा रहे हो…जल्द ही उसका पता लगाओ.

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ढलती उमर में काला लोड्‍ा लिया

दोस्तों आज तक आप ने जीतने भी ब्लॉंड सेक्स स्टोरी देखे होंगे उसमें से अधिकतर में उन्हें काला लंड लेते हुए दिखाई गई होंगी. लेकिन असली जिंदगी में ऐसी बहुत सब ब्लॉनड्स है जिन्होंने ढलती उमर तक कभी काला लोड्‍ा लिया नहीं होता है. जॅसमिन भी एक ऐसी ही ब्लॉंड मिलफ है. जॅसमिन 42 साल की हो गई है लेकिन उसने कभी भी अपने भोंसड़े में काले लंड को आज तक नहीं लिया था.

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Antarvasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 10

बॉन्ड~: अच्छा प्यारे…एक बात बताओ..हालाँकि मैं जनता हूँ की सारे खेल सूत्रधार तुम नहीं कोई और भी है…..मगर ?
देव~: मगर,,,?
बॉन्ड~: फिलहाल सिर्फ़ इतना बता दो की तुमने जज से ऐसा क्या कहा की उसने पहले छग्गा को मारा फिर खुद आत्म हत्या कर ली….?
देव~: मुझे क्या पता…?
बॉन्ड~: मुझे पता है…
देव~: फिर बताओ ना…
बॉन्ड~: जरूर बताएँगे प्यारे…अपना काम भी तो साला यही है…पर पहले मेरे सवालों के जवाब तो मिले.
देव~: अब क्या बाकी रहा….
बॉन्ड~: चलो शुरू से समझता हूँ….रोहित गुप्ता और उसके दोस्त ने मुक्ति का रेप किया……उस रेप में एक तीसरा और भी थी….पोस्टमारतें रिपोर्ट का यही कहना था…ठीक..?
देव चुप रहा.
बॉन्ड~: फिर जब भी.में.ठाकुर ने कानून की मदद ली…वो केस हारने ही वाले थे…तभी एक चमत्कार हुआ…ठाकुर साहेब को सबूत मिला…..नतीज़न उन लोगों ने पूरे परिवार का किडनॅप किया…..और उन्हें मर डाला….देव को चूँकि ठाकुर साहेब ने समझा बुझा कर, देव को वापस भेज दिया…देव वापस लौटता , उससे ही पहले ये सारा कांड हो गया…….मैं ठीक कह रहा हूँ ना…?
देव चुप रहा.
बॉन्ड~: साँप क्यों सूंघ गया प्यारे….कुच्छ तो कहो….आपकी आवाज़ कानों में रस घोलती है..
देव ~: जी..सच है.
बॉन्ड~: मजा आ गया प्यारे…मना पड़ेगा ..कमाल का दिमाग दिया है ऊपर वाले ने उसे…जिसने ये सारा खेल खेला है…पर ?
देव~: पर क्या ?
बॉन्ड~: ये तो थी इंटर्वल तक की कहानी…जब शुरू होती है देव के इंतक़ाम की कहानी….
देव को मना पड़ा..बॉन्ड का एक एक शब्द सच था….सारी कहानी ऐसे सुना रहा था जैसे आंखों देखा हाल सुना रहा हो…पर देव खामोश रहा.
बॉन्ड~: अब यहाँ एक सवाल उठता है…की अगर ठाकुर परिवार गायब होने की कोई जरूरत नहीं थी….जब उन्हें सबूत मिल गया था…
दूसरी बात ..अगर दुश्मनों ने उस सबूत के लिए ठाकुर साहेब का किडनॅप किया था…अगर वो सबूत दुश्मनों को मिल गया था तो पूरे परिवार को मरने की कोई जरूरत ही नहीं थी…इसका मतलब उन्हें वो सबूत नहीं मिला…ईयसलीए एक एक कर सबको मर दिया और शायद कही दफ़ना दिया…या जला दिया हो..
तीसरी बात…..देव ने अपनी और अपने परिवार की सारी आइडी लेकर खुद गायब क्यों हो गया…..अगर तुम देव हो तो जवाब दो….?
देव~: नहीं मिस्टर. बॉन्ड…ऐसा कुच्छ नहीं हुआ…सब मान घाड़ंत बातें है….!
बॉन्ड~: कोई बात नहीं प्यारे…मैं बता देता हूँ…
देव~: जरूर क्यों नहीं…
बॉन्ड~: तो सुनो प्यारे….देव ने पूरे घर को उसी सबूत के लिए खोजा…..वो सबूत उसके हाथ भी लग गया……सबूत देखते ही उसके अंदर का जादूगर जगह उठा……उसने सब की आइडी गायब की और रफूचक्कर हो गया और ये सारा खेल खेला….सही कह रहा हूँ ना…मिस्टर. नकली देव ?
देव~: अच्छी कहानी है बॉन्ड…..तुम्हें फिल्मों के लिए ट्राइ करना चाहिए…एक सुपरहिट फिल्म बन सकती है.
बॉन्ड~: वो प्यारे…सच काहु तो रिटाइयर्मेंट के बाद यही करने वाला हूँ.
देव सोचने लगा…कितना किया है ये…किसी भी बात का बुरा ही नहीं मानता है…..कुच्छ भी कह लो…बड़ा शातिर है ये बॉन्ड……!
पर सवाल फिर वही आ खड़ा होता है प्यारे….बॉन्ड बोला.
देव~: अब क्या सवाल रही गया….आपके पास हर सवाल का जवाब है…इसका भी जोगा.
बॉन्ड~: सवाल ये है प्यारे की इन सबमें तुम्हारा क्या रोल है….तुम क्या कर रहे हो….एक बार का खुलासा कर दम की मैं ये जान चुका हूँ की तुम्हारा चेहरा वास्तविक है…ना मास्क लगा है..ना ही कोई प्लास्टिक सर्जरी हुई है…..फिर इसका मतलब तुम देव नहीं हो…फिर कौन हो…और क्या कर रहे हो….?

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Antavasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 9

अजीत~: ये मुझे नहीं पता…पर ये देव ठाकुर नहीं है…पक्का कह सकता हूँ.इसका खुद की कोई निजी वजह होगी.
प्रिया~: नहीं मिस्टर. अजीत….इसकी कोई निजी दुश्मनी नज़र नहीं आती…मैंने जितनी तहक़ीकात की है….एक ही बात खुलकर सामने आईहाई की इस देव का ठाकुर परिवार से गहरा रिश्ता है….इससे जुड़ी हर बात इसी केस की तरफ इशारा करती है…..एक बात बताओ…?
अजीत~: क्या ?
प्रिया~: आप किसी इंस्पेक्टर. मनिराम को जानते है..?
अजीत~: जी हाँ…यही इंस्पेक्टर. था जब ये हादसा हुआ था…बड़ा भ्रष्ट पुलिसवाला था…एक मोटी रकम ली थी इसने मुक्ति रेप केस को दबाने में…
प्रिया~: ये खुद आजकल पुलिस हिरासत में है…?
अजीत~: क्यों ?
प्रिया~: इसे देव ने ही बर्खास्त करवाया है और कानून के लपेटे में फँसाया है…!
अजीत~: क्या…
“हाँ….प्रिया ने सारी बात डीटेल्स के साथ बताई.
प्रिया~: क्या अब भी तुम यही कहोगे की इस देव की कोई पर्सनल दुश्मनी है..?
अजीत~: कुच्छ समझ में नहीं आ रहा है….आख़िर माज़रा क्या है….मेरा दिमाग घूम रहा है..
प्रिया~: किसी की समझ में नहीं आ रहा है….शायद ये जो भी है….ठाकुर परिवार के सारे राज़ फर्श होने पर ही सच सामने आएगा….ठाकुर केस की हर डीटेल्स खुलने के बाद ही पता चल पाएगा की आख़िर है कौन और सारा रायता क्यों फैला रहा है…सब कुच्छ जाने के लिए मुझे आपकी मदद चाहिए ?
अजीत~: मैं आपके साथ हूँ…बताइए मैं क्या कर सकता हूँ…?
प्रिया~: कुच्छ सवालों के जवाब चाहिए?
अजीत~: पूछिए…क्या पूछना है,,?
प्रिया~: देव ठाकुर कही बाहर पढ़ता था…मैं सुना है वो लॉ का स्टूडेंट था…?
अजीत~: सच है…देव एक ज़हीन दिमाग का मलिक था…इसीलिए ठाकुर परिवार उसे वकील बनाना चाहता था.
प्रिया~: क्या बता सकते हो..वो कोन से कालेज में पढ़ता था…?
अजीत~: ये तो नहीं पता…पर इतना पता है की वो यही मुंबई में ही पढ़ता था.
प्रिया~: क्या….?
अजीत ~: हाँ…!
प्रिया~: आपको कैसे पता….?
अजीत~: जब मुक्ति की मौत हुई तब देव आया था…..ठाकुर अंकल बार बार उसे मुंबई लौट जाने को कह रहे थे…
प्रिया~: आपकी कोई बात नहीं हुई…?
अजीत~: नहीं….उस वक्त पूरा परिवार गुम में डूबा था….मैं सिर्फ़ एक दिन रुका था…अगले दिन लौट आया….आते वक्त मैंने अपना कार्ड दिया था.
प्रिया~: देव कभी आया…?
अजीत~: नहीं…ना ही वो आया और ना ही उसकी कोई खबर मिली.
प्रिया~: उसकी कोई फोटो…कोई और बात..?
अजीत~: नहीं है…!
प्रिया~: कोई बात नहीं….उसका हुलिया ही बता दीजिए…!
अजीत ने जो हुलिया बताया…वो हज़ारों लोगों से मिलता जुलता था….!
प्रिया ने अजीत से ढेर सारे सवाल किए….अजीत सबके जवाब.देता रहा…..
देव की पहचान तो उजागर नहीं हुई पर ठाकुर केस के काफी सारे पहलू उजागर हो गये…..प्रिया वहाँ से विदा लेकर अपने ऑफिस पहुँची.
प्रिया ने सारी कहानी अब तक मिले सबूतों के आधार पर तैयार करके च्चपने का फैसला किया…उसने मुंबई….दिल्ली और रेवड़ी के अख़बार में एक साथ च्चपने का निश्चय किया…दिल्ली और रेवड़ी में भी ताजा खबर का ऑफिस था…सबको एक एक कॉपी भिजवा दी…एक एक कॉपी हर न्यूज चॅनेल को……!
अगली सुबह धमाके की सुबह थी….अब ठाकुर केस फाइल फिर रीयोपन होने वाली थी…प्रिया की उम्मीद से भी बड़ा धमाका होने वाला था….
सब धुरंधारो को क्या पता था की कोई उनसे सारा काम करवा रहा है…ये सारे किरदार तो बेचारे सोच रहे थे की वो सब कर रहे है….पर क्या यही सच था….या कोई मकड़जाल ???????
आज दिल्ली की सुहानी रात थी….शाम को हल्की हल्की हुई बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया था….रोशनी से नहाया शहर…और भीनी भीनी खुशबू भीखेरती हंडी हवा के झोंके आज की रात को यादगार बना रहे थे…
रात के अभी सिर्फ़ 8 बजे थे….देव अपने रूम पर लौटा….दरवाजे पर लगा लॉक खोला और अंदर घुसा तभी एक मर्दाना आवाज़ गूँज उठी…” वेलकम…देव प्यारे…वेलकम !
देव चौंका…घर बंद था….फिर ये अंदर कैसे घुसा..कौन है ये…इस तरह कैसे आया….घुसा भी तो किधर से….कई सवालों से देव घिर आया….जल्द ही खुद पर काबू पाया और बोला~: थेन्कस मिस्टर…
“बॉन्ड….कहते है मुझे…आज़माबी बोला और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया.
देव ने हाथ मिलते हुए कहा~: बॉन्ड….?
बॉन्ड~: जी…बॉन्ड…इंडियन बॉन्ड…प्यार से लोग मुझे दीपक बॉन्ड कहते है….!
देव~: देव ठाकुर…प्यार से लोग देव ठाकुर ही कहते है.
दोनों धुरंधारो के चेहरे पर मुस्कान नाच रही थी.
देव~: आहो…भाग्य हमारे…जो बॉन्ड साहेब इस गरीब के घर पधारे…..बैठिए.
दोनों पास ही पड़ी कुर्सियो पर बैठ गये.
देव~: बॉन्ड सर…को तक़लीफ़ क्यों उतनी पड़ी…नाचीज़ को याद करते ..हाज़िर हो जाता…!
बॉन्ड मुस्कराया….समझ गया की लड़का पक्का खिलाड़ी है…..इससे कुच्छ उगलवाने में पसीना आएगा.
कहने को तो देव भी मुस्करा रहा था…पर अंदर ही अंदर कोई बात उसे परेशान कर रही थी…पर देव ने चेहरे से जाहिर नहीं होने दिया….बॉन्ड जैसा शातिर जब तक ताड़ पता..देव खुद पर काबू पा चुका था.
देव~: तो बॉन्ड साहेब..हमें आपका मिलने का तरीका पसंद आया…!
बॉन्ड~: पर हमें आपकी एक बात पसंद नहीं आई..प्यारे…!
देव~: वो क्या??
बॉन्ड~: भाई..सीधी सी बात है…हम बॉन्ड है तो खुद को बॉन्ड ही कहेंगे..मगर….?
देव~: मगर…?
बॉन्ड~: आप खुद को देव ठाकुर क्यों कह रहे है…हमारी समझ में नहीं आ रहा है…प्लीज़ समझाए हमें..प्लीज़.
बॉन्ड ने सचमुच हाथ जोड़ दिए.
देव चौकना हो गया…देव ने बॉन्ड को पहली नज़र में काफी हद तक पहचान लिया था पर इतना शातिर है समझ नहीं पाया था…पर उसकी बताओ ने साफ दर्शा दिया की उसको कुच्छ कहना..सोच समझ कर कहना…देव ने खुद पर काबू रखा.
देव~: फिर आप ही बता दीजिए ना की अगर मैं देव ठाकुर नहीं तो फिर कौन हूँ ?
देव के इस तरह खुले छल्लंगे से बॉन्ड भी हिल गया….वो समझ गया जितना उसने सोचा है लड़का उससे कई कदम आगे है.
देव~: आप मज़ाक अच्छा करते है..मुझे पसंद आया.
बॉन्ड~: कभी कभी हल्का फुलका छोड देते है प्यारे…..!
देव~: वैसे मिस्टर.बॉन्ड…आप करते क्या है….?
बॉन्ड~: समाज सेवा…!
देव~: वो कैसे…?
बॉन्ड~: च्चिपे हुए रहस्य को उजागर करना….लोग जिन्हें चमत्कार कहते है…उन चमत्कारो की पॉल खोलना समाज सेवा ही तो है प्यारे….सही कह रहा हूँ ना…?
“जी….देव इतना ही कह पाया…पर बॉन्ड के जवाब ने उसका सारा परिचय खुद भी खुद दे दिया…देव सतर्क हो गया.
देव~:यहाँ किस चमत्कार की पॉल खोलने आए है…महोदय ?
बॉन्ड~: कई साल पहले गायब हुआ साक्ष् एक नये चेहरे के साथ प्रकट होता है…खुद को वो जो बताता है….असल में वो है नहीं….क्या ये चमत्कार से कम है….अब जहाँ चमत्कार है …वहाँ हम है यानि..बॉन्ड ..दीपक बॉन्ड…!
इतना कहकर बॉन्ड ने अपनी गहरी नज़रे देव पर जमा दी…पर मजाल थी की देव के चेहरे पर कोई लकीर भी उभर जाए….देव बस मुस्कुराता रहा.
देव~: अच्छा काम है ..करते रहिए.
बॉन्ड~: पर कितने अफ़सोस की बात है की ऐसी अच्छे काम में भी लोग अपना सहयोग नहीं करते है….

बॉन्ड~; पर आप तो ऐसे नहीं है…है ना मिस्टर. गुमनाम ?
देव~: गुमनाम…?
बॉन्ड~: जी…जब आप देव है ही नहीं..जो की खुद को बताते है..फिर तो गुमनाम ही हुए ना..?
देव~: अगर ऐसा है तो साबित कीजिए..
देव ने सीधा छल्लंगे किया.
बॉन्ड~: आवास्या करेंगे भक्ता….बॉन्ड बाबा के दरबार से कोई निराश नहीं जाता….पहले रूम का पंखा और खिड़कियां बंद कीजिए….फिर करेंगे.
देव बॉन्ड की अजीब डीमाड से चकरा गया….देव अगर चाहता तो बॉन्ड के किसी भी सवाल देने से मना कर सकता था…पर बॉन्ड की बातों से समझ गया की ये आदमी सारा होमवर्क करके आया है….ये भी उसी केस की पड़ताल में जूता है जिस पर कई धुरंधर काम कर रहे है….बस सवाल एक समझना बाकी था की बॉन्ड किस डिपार्टमेंट है और कितना पहुँचा हुआ खिलाड़ी है…देव बस यही जाने के लिए बॉन्ड के सवालों का जवाब दे रहा था…
देव~: भला वो क्यों..
बॉन्ड~: क्या है ना प्यारे…मुझे अजीब सी बीमारी है….कभी कभी गर्मी के मौसम में भी ठंड लगने लगती है…जैसे की आज….बस थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी….तब तक ज़रा मेहमान का कहना मानो…!
देव की समझ में सचमुच कुछ नहीं आया…सारी खिड़कियां और फन वगैरह बंद कर फिर अपनी जगह आ बैठा.
बॉन्ड~: एक बात तो माननी ही पड़ेगी…अच्छे मेजबान हो प्यारे.
देव~: थेन्कस मिस्टर. बॉन्ड.
बॉन्ड~: अब शुरू करते है…मॅजिक शो….आप अगर देव है तो अपनी आइडी दिखाए.
देव ने अपना ड्रॉयिंग लाइसेन्स दिखाया…
बॉन्ड गौर से ड्रॉयिंग लाइसेन्स देखता रहा.
देव~: असली ही है ना…?
बॉन्ड~: शुक्र है …आप की तरह आपका लीएसेंसे तो नहीं निकला.
देव~:वो कैसे…?
बॉन्ड~:सब बताएँगे प्यारे…ज़रा साँस तो लेने दो…?
रूम में उमस सी हो गयी….माथे पर पसीने की बूंदें झलक उठी….देव के माथे पर भी पसीना चालक आया.
बॉन्ड~: अब हम ठीक है प्यारे…फन चालू कर सकते हो…खिड़कियां खोल सकते हो…
देव~: अगर आपको फिर ठंड लगने लगी तो…?
बॉन्ड~: नहीं मेरे भोले बालम….हमें ये बीमारी दिन एक ही बार होती है….और आज की हो चुकी है…!
देव~: बड़ी अजीब बीमारी है….
बॉन्ड~: अब क्या करे प्यारे…है तो है.
देव ने फिर उमस से निजात पाने में लग गया…फिर वापस आकर बैठ गया.
बॉन्ड~: आप इसे जानते है….?
बॉन्ड ने एक तस्वीर पटकी….
देव~: जी..नहीं…!
बॉन्ड~: कमाल है…आप अपने पदोषी तक को नहीं जानते….!
देव~: होगा….कोई जरूरी तो नहीं की मैं सब पदोषियो को जनता हूँ ?
बॉन्ड~: कोई जरूरी नहीं प्यारे…पर ये महोदय आपको अच्छे से जानते है…इनका कहना है की ये आपसे कई बार मिल चुके है…
देव~: हो सकता है….मुझे याद नहीं.
बॉन्ड~: चलो कोई बात नहीं….पर इनका कहना है की जब आप अपने नये घर में शिफ्ट हुए थे तबसे लगातार ,लगभग राज मुलाकात होती थी….?
देव~: मगर मैं तो नये घर में कभी रहा ही नहीं…!
बॉन्ड~: फिर कहाँ रहे..?
देव~: अपने हॉस्टल में…
बॉन्ड~: कौनसा हॉस्टल..?
देव~:इतना कुच्छ बताया है …कुच्छ तो खुद पता कीजिए…आख़िर बॉन्ड है आप…दीपक बॉन्ड.
दोनों एक साथ मुस्करा उठे.
बॉन्ड~: वो भी पता कर लेंगे प्यारे…?
देव~: करना भी चाहिए…आख़िर बॉन्ड जो है आप.

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Antavasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 8

बॉन्ड~: ये सब छोड प्यारे….आगे क्या करने का मूंड़ है मेरी जान….?
मुन्ना~: उसके बाप और पूरे खंडन की कुंडली निकालूंगा और तुम ?
बॉन्ड~: तुम तो जानते हो प्यारे…मेरा काम करने का अंदाज़ थोड़ा अजीब है….मैं पहले देव से मिलूँगा फिर आगे की आगे सोचूँगा.
मुन्ना~: जैसी तेरी मर्जी….!
मुन्ना जनता था की बॉन्ड सिर्फ़ अकेला काम करता है…अपने ही अंदाज़ में…उसे कोई राय देना…सूरज को दीपक दिखाने जैसा है..
मुन्ना ने देव का पता दिया और जितना भी जनता था सब कुच्छ बॉन्ड को बताया …
मुन्ना~: जितना जनता था सब बता चुका हूँ.
बॉन्ड~: इतना काफी है…..अब इस गाथा को बंद कर….बोरियत होने लगी है….कुच्छ खाने का इंतजाम कर…भूख लगी है….साली आंखों के आगे खाने की प्लेट नाच्छ रही है….!
मुन्ना मुस्कराया…इंटरकम पे खाने का आर्डर दिया और खाना खाया…फिर आराम करने लगे…
सुबह बॉन्ड दिल्ली जाने वाला था और मुन्ना आगे की जानकारी जुटाने में लगने वाला था…रात काफी हुई तो दोनों ने अपनी बातों को विराम दिया और सो गये..
सुबह दोनों अपने अपने रास्ते पे चल दिए…..
एक नये धमाके का सामना करने….दिमाग को फिर नया झटका खिलाने…..!!!!!!
मिस्टर. सैनी ने जो कहानी सुनाई उसे सुनकर प्रिया की आंखें गीली हो गयी….दिल रो पड़ा….बड़ी दर्द भारी कहानी थी…कहानी सुनकर प्रिया क्या किसी का भी दिल रो पड़ता…
ठाकुर परिवार के साथ बहुत ना इंसाफी हुई थी….जुर्म का तांडव उनकी जिंदगी पर बेशर्मी से चला था.
बृजमोहन ठाकुर उनका सारा परिवार लापता होने के आख़िरी पल तक बड़ी बहादुरी से लड़ते रहे थे…
कहानी,कुच्छ इस तरह थी..
ठाकुर परिवार बड़ा ही सज्जन और न्यायप्रिय था.
भी.में.ठाकुर जिस कालेज में पढ़ते थे उसी कालेज में मुक्ति पढ़ती थी…मुक्ति का एक क्लाइमेट था…रोहित गुप्ता…
वो किसी जज का बेटा था…जैसा बाप वैसा ही आयास बेटा….बड़ा ही बिगड़ा हुआ लड़का था…उसकी नज़र मुक्ति पर पड़ी…वो मुक्ति का दीवाना हो गया…..प्यार या शादी के लिए नहीं…सिर्फ़ एक रात गुजरने के लिए….वो अक्सर मुक्ति को छेड़ने लगा……
शुरू शुरू में तो मुक्ति ने ताला….पर जब रोहित की हरकतें ज्यादा तरफ गयी तो उसने अपने अंकल से शिकायत की….ठाकुर साहेब ने सारी कालेज के सामने उसको जमकर लताड़ा.
रोहित से ये बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई…..एक बार उसने मुक्ति के साथ कालेज के पीछे खाली पड़ी पुरानी खंडहर जैसी इमारत में ज़बरदस्ती करने की कोशिश की….संयोग से किसी की नज़र पड़ गयी….मिस्टर. ठाकुर को सूचना दी गयी….मौके पर मुक्ति को बचाया गया और रोहित को कालेज से दिस्मीस कर दिया गया.
फिर कुच्छ दीनों बाद मिस्टर. ठाकुर और मुक्ति का किडनॅप कर लिया गया….मिस्टर. ठाकुर की आंखों के सामने मुक्ति का बलात्कार किया गया….कई बार उसे नोचा गया……मुक्ति सहन नहीं कर पाई और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया ….
मिस्टर. ठाकुर को जब होश आया तब तक मुक्ति दम तोड़ चुकी थी…..उनकी फूल जैसी बच्ची को दरिंदो ने जमकर नोचा था…
मिस्टर. ठाकुर कानून की शरण में गये….मुक्ति की लाश को प्लोसे ने पोस्टमारतें के लिए भेजा….रोहित और उसके दोस्त के खिलाफ मामला दर्ज़ किया गया…कहते है उस वक्त देव आया था…मगर मिस्टर. ठाकुर ने ये कहकर देव को कुच्छ दिन वापस भेज दिया की” मुझे कानून पर पूरा भरोसा है.देव ने काफी जिद की पर मिस्टर ठाकुर नहीं मैंने और देव को मजबूरन वापस जाना पड़ा.
मिस्टर. ठाकुर सिर्फ़ एक बात से हैरान थे की मुक्ति का रेप 3 लोगों ने किया था…लगभग 2 – 2 बार….रोहित और उसका साथी…सिर्फ़ दो थे…तो ये तीसरा कौन था….
रोहित और उसके साथी को गिरफ्तार किया गया….उसी दिन उसकी जमानत हो गयी….
मामला पूरा 6 महीने तक खींचा.
कहते है जिस अदालत में रोहित पर केस चला …उसके जज उसका ही बाप था.
गवाह और सबूत खरीदे बेचे गये…ठाकुर परिवार को डराया धमकाया गया….
दिल्ली के सबसे बारे गुंडे च्ग्गा ने धमकाया.
मगर मिस्टर. ठाकुर नहीं डरे….आख़िर कर एक रोज़ ऐसा लगा की रोहित अगली तारीख में छूटने वाला है…उसके ठीक पहले दिन मिस्टर. ठाकुर के हाथ कोई ठोस सबूत लगा…जिसमें रेप करने वाला तीसरा साक्ष् भी था…..एक वीडियो फुटेज थी..जो किसी तरह मिस्टर. ठाकुर के हाथ लग गयी…मगर इसका पता डुस्मानो को लग गया और उसी रात पूरा परिवार गायब हो गया….काफी तलाश की गयी मगर कोई खबर नहीं मिली.
आख़िरकार फैसला रोहित के हक़ में हुआ…उसे बेइज्जत बड़ी कर दिया गया….और ये ठाकुर परिवार की कहानी अधूरे में ही बंद हो गयी.
कहते देव को आस पड़ोस के लोगों ने सिर्फ़ एक रात को अपने घर में घुसते देखा था…
मगर उसके बाद वो भी गायब हो गया….
पुलिस को घर में कुच्छ भी ऐसा नहीं मिला जो देव की आइडी प्रूफ हो…..ना किसी अन्यका कोई आइडी प्रूफ…..पुलिस की समझ में नहीं आया की कोई क्यों इनके पहचान के दस्तावेज़ मिटा रहा है और क्यों..कौन है वो…?
लाख कोशिश के बाद भी पता नहीं लगा…पुलिस के पास मुक्ति और मिस्टर. ठाकुर के अलावा किसी का कोई फोटो नहीं था..
धीरे धीरे सब इसे भुलाते गये.
सैनी ने सारी कहानी सुनकर एक लंबी साँस ली….उसकी आंखों से आँसू टपक रहे थे…आवाज़ भारी हो गयी थी.
ऐसा ही कुच्छ हाल प्रिया का था….ठाकुर परिवार की कहानी ने उसे झकझोर दिया था…उसकी भी आंखें गी थी.
प्रिया ने अपनी आंखें रूमाल से पोंछी….एक लंबी साँस ली …खुद पर काबू पाया और बोली~: सर, आज एक वादा मैं आपसे करती हूँ की मिस्टर. ठाकुर के लिए मुझे कुच्छ भी करना पड़े…मैं उन्हें इंसाफ दिलाकर रहूंगी….उनकी खोई इज्जत उन्हें लौटा कर रहूंगी….अगर वो जिंदा है तो उन्हें पाताल से भी खोज निकालूंगी….!
सैनी प्रिया के तमतमाए चेहरे देखता रहा.
प्रिया फिर बोली~: पर मिस्टर. सैनी…पता नहीं मुझे ये अधूरी कहानी लग रही है…कुच्छ अब भी छुपा है….जो मुझे पता लगाना है…..कोई ऐसा है जो मुझे थोड़ा और डीटेल से बता सके…?
सैनी ~: शायद ताकिर साहेब के बारे बेटे का एक जिगरी दोस्त है जो आजकल मुंबई में रहता है…..शायद वो बता सके…?
प्रिया ने पता लिया और उठ खड़ी हुई….फाइल में से फोटो की मॉब. से फोटो खींची…ये तकुर और मुक्ति की फोटो थी…प्रिया मुड़ी तभी सैनी ने टोका~: क्या मैं जान सकता हूँ की आप इतनी बेचैन क्यों है….?
प्रिया~: मैंने बताया था ना की आर्तिकल…
सैनी~: वो झूठ था प्रिया ग…सच बताइए.
प्रिया ने कुच्छ पल सोचा और फिर बोली~: जिस जज गुप्ता ने ये सारा फ़साद किया है मैं उनकी ही बेटी प्रिया गुप्ता हूँ…..इतना कहकर प्रिया बाहर निकल गयी.
सैनी अपनी कुर्सी से कई फीट ऊपर उछाल पड़ा…उसकी आंखें फटी रही गयी….चेहरा खुला का खुला रही गया…उसने जब तक खुद पर काबू पाया…प्रिया कालेज बहुत दूर निकल चुकी थी…!!!!!!!!

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कोमल आंटी अपना बनाया

फ्रेंड्स, मेरा नाम जय है मैं 23 साल का हूँ ओर मैं मुंबई में रहता हूँ और जहां में रहता हूँ वहां 4त रूम में एक आंटी रहती है उनका नाम कोमल है और उनका 2 महीने का छोटा सा बेबी है, पहले में रोज़ उसे खिलाने जाता था सच काहु तो मैं कोमल आंटी को देखने जाता था और कोमल बहुत ही खूबसूरत ओर हसीना थी और उसके बूब्स बहुत बारे ओर गोल थे ओर वो बड़ी ही बेशर्म ओर लापरवाह थी, जब आंटी अपने बेबी को दूध पिलाती तो मैं चुपके-चुपके उनके बूब्स को देखता था और आंटी मुझे ऐसे देखते हुए देख लेती थी ओर मुस्करा देती थी, वो जानती थी की मैं चोरी-चोरी उनके बूब्स देखता हूँ और उनके बूब्स देख के मेरा दिल करता की उन्हें मुंह में भर के उनका पूरा दूध चूस लंड पर मैं उनसे कभी कह नहीं पता था, घर में आंटी अक्सर पतले कपड़े कोई पुरानी टी-शर्ट या नाइटी और वो अंदर से कुछ नहीं पहनती थी, जिससे उनके निप्पल साफ दिखाई देते थे और अक्सर उनकी टी-शर्ट से उनके निप्पल उभरे हुए साफ दिखाई देते थे.

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बीवी ने 9 इंच का लंड चूसा

मैंने भी प्यार में धोखा खाया है और वो भी इतना बड़ा की बस पुच्छे ही नहीं. मेरी वाइफ का नाम अनिता जायसवाल है और वो एक नंबर की छाती हुई रंडी है. कभी कभी तो वो मेरे सामने ही फ़्लर्ट करती है. साला दिमाग तो खराब होता है लेकिन क्या करे अब प्यार किया तो कुछ कह भी नहीं सकते. वो कहती है की मेरा नेचर तो तुम्हें पहले से पता था फिर तुमने क्यों प्रपोज़ किया था. अब मैंने तो नेचर पे लाइन मारा था चुदस पर नहीं. साली किसी के साथ भी चालू हो जाती है और 8 9 इंच का लंड मिल जाए तो खुशी खुशी से मरवा भी लेती है अपनी.

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न्यूड देसी गर्ल ने शान से लंड

दोस्तों आज आप के लिए एक हॉट दिल्ली गर्ल प्रिया का कॉक सकिंग वीडियो ले के आए है. यह न्यूड देसी गर्ल ने आज अपने भाई के अच्छे और खास दोस्त कबीर के लंड को अपने मुंह में भर के उसे शांति और स्ट्रेस से रिलीव किया. कबीर अक्सर प्रिया के घर उसके भाई के साथ आता था और इन दोनों के बीच में वही आँखमिचोली हो गई. फिर प्रिया के कब एडमीशन में उसने मदद कर दी तो वो लोग और भी करीब आ गये. कबीर ने कब किया हुआ था और उसकी कॉलेज में पहचान भी थी जिसकी वजह से प्रिया ने उसे फाँस लिया और इस न्यूड देसी गर्ल ने उसे अपनी चुत का और मुंह का चाहनेवाला भी बना लिया.

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नर्स ने क्लिनिक मे कड़क लंड

डॉक्टर ने नर्स सिमरन को चुदाई के लिए रेडी रहने के लिए कहा. यह एक अनेनी डॉक्टर है जिसके पास मुश्किल से दिन में 3-4 पेशेंट्स आते है. लेकिन डॉक्टर ने खुद अपनी दवाई कहा कहा के कड़क लंड बनाया है अपना. घर में वो बीवी को चोदता है और क्लीनिक में वो अपनी इस हॉट मेच्योर नर्स की चुदाई करता है.

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दोस्त के साथ मॉमी को चोदा

हेलो फ्रेंड्स, यह मेरी दूसरी स्टोरी है,जो में आप लोगों के साथ शेयर कर रहा हूँ,आशा करता हूँ आप लोगों को मजा आएगा.मेरा नाम अभिषेक है और मेरी मॉमी का नाम अंजलि है.वो 37 साल की है और देखने में बहुत सुंदर हैं.उनका फिगर जो की मैंने उनकी ब्रा और पैंटी के लेबल से देखा था 36/32/40 है. वो ज्यादा टाइम सलवार-सूट हे पहनते हैं.हिप्स बिलकुल गोल गोल हैं,और वो काफी गोरी हैं.जब भी में उनके साथ मार्केट जाता हूँ,सब लड़के और अंकल उनकी गान्ड और बूब्स को घूरते रहते हैं. सब का मुंह उनको चोदने का करता होगा. वो हैं हे इतनी सेक्सी की रहा नहीं जाता. मैंने बाथरूम के दूर में कई सारे होल करे हुए हैं जहाँ से में उन्हें नंगी नहाते हुए देखता हूँ और मूठ मरता हूँ. उनकी चुत और छाती देखते हे मेरा लंड टन जाता है और हिलाए बिना रहा नहीं जाता.
बात 8 महीने पुरानी है,जब मीट दोस्त र्शजेश को पता चला था में अपनी मॉमी पर हॉट हूँ,और उसने उन्हें नहाते हुए देख लिया था,मेरे फ़्रेंड राजेश ने उन्हें चोद भी लिया था और एम एम एस बना के मुझे भी दिखाया था.प्रॉमिस करने के बाद भी बात लीक हो गयी और मेरे एक दोस्त आशीष को इस सब के बारे में पता चल गया,अब वो मुझे ब्लैकमेल कर रहा था की वो भी अंजलि आंटी को नहाते हुए नंगी देखना चाहता है.
आशीष “यार तुझे मुझ पर विश्वास नहीं है क्या,में राजेश से तो अच्छा हे हूँ.”
“में उसे बोला की यार यह सब सही नहीं है”
आशीष “सालों तुम उन्हें नंगी देख कर मजे ले रहे हो और मुझे बोल रहे हो की ठीक नहीं है,मुझे भी उन्हें एक बार देखना है, क्योंकि वो उन्हें 2 साल पहले से प्यार करता है”अगर में नहीं मना तो वो क्लास में सब को बता देगा.
डर के मारे में मान गया और कल उसे घर पूर भुलाया.
अगले दिन सुबह सुबह वो मेरे घर आ गया,और हम आंटी के बाथरूम में जाने का इंतजार करने लगे.उसका लंड अभी से उसकी पेंट के अंदर टेंट की तरह ताना हुआ था.मम्मी को नंगी देख कर वो पेंट के ऊपर से हे अपना लंड रगड़ रहा, उसका फेस पूरा रेड हो गया था और उनके नंगे शरीर को पूरा निहार रहा था.फिर उसने वो एम एम एस देखे और मेरे रूम में आ के मूठ मारा. एसा हे कई दिन तक चलता रहा.
एक दिन में मॉमी की ब्रा और पेंटी लेकर मूठ मर रहा था, और मॉमी ने यह सब करते हुए मुझे देख लिया,मैंने जान के दरवाजा बोल्ट नहीं किया था,मुझे देखते हे मॉमी एक दम से अपने रूम में चली गयी, में पीछे पीछे उनके पास गया और सॉरी फील करने लगा.पूर वो बहुत नाराज़ लग रही थी.अगले दिन भी उन्होंने मुझसे बात नहीं करी,तो मैंने गुसी में उन्हें उनका एम एम एस दिखा दिया उसे देखते हे वो डर गयी और मुझ पर गुस्सा करने लगी.
में उनसे बोला”सॉरी मॉमी मुझे माफ कर दो पूर आप मुझे बहुत सेक्सी लगते हो,में भी आपको प्यार करना चाहता हूँ”
यह सुन के आंटी शर्मा गयी और उनका चेहरा एक दम लाल हो गया.
में समाज गया की यह मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहिए, और मैंने उन्हें बाहों में लेकर उनके हिप्स दबाने लगा, वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी पर मैंने उन्हें जाने नहीं दिया और दोनों हाथों से बूब्स प्रेस करने लगा.
मम्मी”क्या कर रहे हो,जाने दो मुझे”
“ई लव यू मम्मी”ई लव यू. प्ल्स मान जाओ.
मम्मी”अगर तेरे अंकल मुझे अच्छे से चोदते तो में कभी किसी और के साथ यह सब नहीं करती,पूर अपने हे लड़के से यह सब करना बहुत गलत होगा”
“मम्मी कुछ गलत नहीं है, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा”
ठीक है पूर एक और आखिरी बार.
फिर में उन्हें चूमने लगा. आह सारी बॉडी में जैसे करेंट दोड़ गया,उनकी सांसें थोड़ी हे देर में भारी हो गयी और वो मस्त होने लगी.वो पेंट के ऊपर से मेरा लंड दबा दबा के देख रही थी.में उनके बूब्स की गोलाई दबा दबा के चेक करने लगा,बहुत अच्छा लग रहा था. फिर उन्होंने मेरी पेंट और आंडरवेयर उत्तर दिया और टी-शर्ट उत्तर के मुझे ऊपर से नीचे तक निहारने लगी,में पूरा नंगा उनके सामने खड़ा था और मेरा लंड झटके मरते हुए उनके फेस को देख रहा था.वो बोली
“है बाबू तुम्हारा औजार तो काफी मोटा है”
“में बोला,मॉमी आप भी पूरी नंगी हो जाओ मुझे आपकी गान्ड और चुत देखने हैं. गान्ड और चुत शब्द सुनते हे वो शर्मा गयी और धीरे-2 अपने कपड़े उतरने लगी,वाउ यकीन नहीं हो रहा था मॉमी पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी,में बिना देर करे उनके बूब्स सक करने लगा और एक हाथ से उनकी योनि रगड़ने लगा.म्‍म्म्मम पूरी गीली थी वो.फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी चुत लेने लगा,थोड़ी हे देर में मेरा दोस्त आशीष जो मेरे रूम में छुपा था नंगा हो कर आ गया और उनकी गान्ड चाटने लगा,मम्मी इतनी गरम थी की उन्होंने उसे भी मना नहीं करा,और हम दोनों घंटो तक उनके शरीर का मजा लेते रहे.इस बीच वो 4-5 बार झाड़ गयी,पर हम बड़ी -2 शाम तक उन्हें चोदते हे रहे.अब जब भी मौका मिलता है,हम उनकी मरते हैं और तीनों मजे करते हैं.स्टोरी कैसी लगी बताना.कमेंट फॉर मोर ओर फॉर उनकी पिक्स.अभिषेक

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